Sunday, 12 September 2021

माँ

मातृ ममता की वेदी पर,
मैंने बचपन बीताया है,
माँ तुम्हारी गोद में,
जाने कितना स्नेह पाया है।।

मैं हूँ बस परछाही तुम्हारी,
मुझमे अंश तुम्हारा है,
खुश रहो माँ तुम सदा,
बस यही स्वर्ग हमारा है।।

माँ तुम हो अनमोल खज़ाना,
खर्च कभी न हो पाएगा,
प्यार तो है निःस्वार्थ तुम्हारा,
वो और कहाँ मिल पाएगा।।

जननी आज जब खुद बनी माँ,
वो प्यार तेरा समझ आया है,
अपनी ममता में तुम्हे ढूंढती,
तेरा आँचल याद फिर आया है।।

इस धरा की हर माँ सबल,
दुर्गा भवानी अतुलित बल
शत शत नमन हर माँ को मेरा,
त्याग की मूरत ये हर पल।।

मोती की माला

एक माला मेरी लाखो की,
लाखो का उसका हर मोती था,
हर मोती उसका एक लम्हा,
एक एक करके जिनको बुना था।

देखो वो माला मेरी टूट गयी,
और मोती सारे बिखर गये,
लम्हे सारे याद है अब भी,
पर अश्रु में सब धुंधला गये।

हर मोती को मैं फिर चुनु,
हर मोती को मैं फिर रखु,
धागा नही पर मेरे पास,
वो माला फिर मैं कैसे बुनु।

धागा था जो टूट गया,
लम्हा हर एक छूट गया,
बंधी गाँठ जो धागे में,
मोती फिर पिरोया न गया।

कैसे पिरोऊँ अपनी माला को,
कैसे संजोऊ उन लम्हो को,
वो माला नही मेरी अब,
जिसमे जिये हजारो लम्हो को।

एक माला मेरी लाखो की,
लाखो का उसका हर मोती था,
हर मोती उसका एक लम्हा,
एक एक करके जिनको बुना था।

मन पतंग

झर झर झर झर बह निकली,
मेरे अश्रु विषाद की धारा,
है मन उदास, ना कोई खास,
ना कोई आज मुझे प्यारा।

मन पतंग का तंग कटा,
डोर हाथ से छूट गयी,
पास के वीराने तने पर,
आज पतंग मेरी अटक गयी।

कोई खींचता है डोर कभी,
कोई लूटता मेरी पतंग कभी,
हर झटके से वो फट जाती,
पर हाथ किसी के ना आयी कभी।

जो फट गई, जो कट गयी,
मन पतंग कहीं उलझ गयी,
शोक मनाता दिल बार बार,
अश्रु से मेरी कमीज भीग गयी।

आज फिर उठता प्रश्न यह,
कितना शोक मनाऊ मैं?
एक पतंग के कट जाने से,
क्या फिर पतंग न उड़ाऊ मैं?

एक और पतंग ली हाथ में,
बांध दी तंग कस कर इस बार,
हवा के संग बह उड़ी वो,
छू लिया गगन को इस बार।

कट जाए या उड़ जाए,
ना शोक है ना लोभ मुझे अब,
कोई कितना भी जोर लगाए
ना मन पतंग कटने का डर अब।

झर झर झर झर बह निकली,
मेरे अश्रु विषाद की धारा,
है मन उदास, ना कोई खास,
ना कोई आज मुझे प्यारा।

एक बार फिर चलो तुम मधुशाला

सबके हाथो में हो मधु का प्याला,
न कोरोना का डर हो न कोई वहाँ रोने वाला,
कोई हमे कुछ कहे, कोई हमारी सुनने वाला।।
एक बार फिर चलो तुम मधुशाला।।

हर चेहरे पर मुस्कान बिछी हो,
हर घूट पी कर , लबो पर कोई गीत छिड़ा हो,
दोस्तों के साथ जमी हो महफ़िल हाला,
एक बार फिर चलो तुम मधुशाला।।

दीन हीन या हो धनवान, कोई फर्क नही करती ये शाला,
न भेद कोई भी करता है, इसके रस को पीने वाला,
कीमत न पूछ इसकी, बहुमूल्य है ये पावन हाला,
एक बार फिर चलो तुम मधुशाला।।

अंतिम बार समझ कर, हर रोज आते है इसके दर पर,
सब कुछ लुटा देने को तत्पर, रहता मधु को पीने वाला,
जीने की चाह में शायद लूट रहा है योवन हाला,
एक बार फिर चलो तुम मधुशाला।।

प्यार की आंधी

प्यार की आंधी खूब चली,
कुछ दिल बिखरे, कुछ आबाद हुए,
किस्मत हर एक की बुलंद न थी,
कहीं दीप जले, कहीं बुझ गए।।

दिल में तूफान जब भी उठा,
लहरे समंदर की फीकी पड़ गयी,
चाहत में किसी के कमी न थी,
कुछ लकीरे मिटी, कुछ नई बन गयी।।

वही मेरे शिव हैं।

जो साकार है, निराकार भी,
अनंत जिनके नाम है,
वो शर्व भी है और शैव भी,
वही मेरे शम्भू हैं, वही मेरे शिव हैं।

जो सगुण भी है और निर्गुण भी,
जो सृष्टि के कण कण में है,
जो रुद्र भी है और महाकाल भी,
वही मेरे शम्भू हैं, वही मेरे शिव हैं।

वो भूत में है और भविष्य में भी,
वही भ्रह्मा, विष्णु और महेश है,
वो आदि, मध्य और अंत मे भी,
वही मेरे शम्भू हैं, वही मेरे शिव हैं।

योगियो का योग है, अघोरी का गुरूर भी,
भक्तों के सखा है, और जन जन के पिता भी,
प्राणियों के प्राण है, और मेरा तो सुकून भी,
वही मेरे शम्भू हैं, वही मेरे शिव हैं।

खुशी है सिर्फ हरि नाम में

ज़िन्दगी की दौड़ में,
बचपन कहीं गुम गया,
जवानी का जोश भी,
समय के साथ सो गया।।

जवानी का भी बाजार लगा,
हर किसी की यहाँ बोली लगी,
हम में भी कुछ हुनर था शायद,
पर अपना मोल पता न लगा।।

अनुभवो का दायरा बढ़ता रहा,
ख्वाहिशे मेरी बदलती रही,
हर चीज पाने की चाह में,
खुशियाँ मेरी जाती रही।।

अनगिनत नौकाएँ नदी में जैसे
बहती रहे बहाव के संग,
किनारे की खोज है सबको,
नाविक मगर किसी बिरले के संग।।

छोड़ कर तू इस बाजार को,
नाविक अपना ढूंढ ले,
दौलत, शौहरत से खुशी नहीं,
खुशी है सिर्फ हरि नाम में।।

First year of my marriage

Those wonders of your eyes,
That crazyness of your smile,
I will ensure for whole life,
That they go an extra mile..

Droplets of those tears,
Loneliness and your fears,
And in every such moments
I will always be there..

You are so beautiful,
And your heart so cheerful,
Your soul is made of Gold,
It ensures that I never feel cold..

First year of our marriage,
It feels, I have been with you for ages,
cherishing every day of this year,
Beautiful script written on every pages..

I am not perfect and have many flaws,
But love happens and has no clause,
I am deeply in love with you,
Your love is a gift from Santa-Claus..

I am not shy to speak this up,
But writing is effective to bring this up,
You are my inspiration for every line,
This poem is for you not for mine..

हासिल कर

मुझे वो ना मिला जिसका मैं हकदार था,
इस्तेमाल करके बहुतों ने मुझे छोड़ा है,
है कुदरत का नियम यही मेरे दोस्त,
अपने हक के लिए तो लड़ना पड़ता है।।

काटों पर चलकर राह हमने तय की थी मगर,
फूलों का बिछौना कभी नसीब न हुआ,
नजरें जरूर थी हमारी मंजिल पर मगर,
यूहीं कोई पीठ पर खंजर मार कर चला गया।।

दर्द बहुत दिया है अपनो ने मगर,
हर दर्द की दवा भी कोई अपना ही है,
एक दरवाजा बंद हुआ जो तक़दीर का,
देख मालिक ने कितने ताले खोल दिये है।।

अब फिर अपने इरादे तू बुलंद कर,
जी जान लगा, खून पसीना तू एक कर,
हक तेरा है तेरी मंजिल पर, दिखा दे सभी को,
रोक न पाए कोई तुझे, वो मुकाम तू हासिल कर।।

नए दम्पत्ति को आशीर्वाद

उपरवाले ने लिख कर भेजी है,
शुभम भाव्या जोड़ी तुम्हारी,
खुशहाल रहे , आबाद रहे,
यही है बस दुआएं हमारी।।

अनुभूति हज़ार है इस रिश्ते में,
रंग हज़ार इसके हर किस्से में,
नौक झौंक से बंधा हर दिन है,
रूठना मनाना अब तुम्हारे हिस्से में।।

अपनो से भी अपना नाता है ये,
सात दिनों का नही सात जन्मों का है ये,
हमसफर हमकदम बन जाओ तुम अगर,
रास्ते सब आसान बन जायेंगे ये।।

नया जीवन बसाओ अब तुम,
संग एक दूसरे के रहो अब तुम,
नितिन मीनाक्षी का आशीर्वाद है,
जल्दी से दूदो नहाओ, पूतो फलो तुम।।

अपनी शक्ति पहचान तू

घड़ी घड़ी की खुशियाँ है,
जी ले हर उस घड़ी को तू,
घड़ी घड़ी के गम आएँगे,
ना उसमे फिर घबराना तू ।

सुबह के बाद शाम है,
और शाम के बाद अंधेरा,
हर रात के बाद सवेरा होगा,
इतना यकीन रखना तू।

श्री कृष्ण ने कहा था गीता में,
योग होता है सम भाव में,
सुख दुःख जीवन का अभिन्न अंग,
जैसे उफान समुद्र की लहरों में।

अचल पर्वत की स्थिरता को,
आत्म समागम करले तू,
तोड़ सके न कोई प्रलय,
इतना अटल बन जाना तू।

गर्मी ज्वालामुखी में जितनी,
ऊर्जा है तेरे अंदर उतनी,
तपती धूप में चमक उठे,
वो कनक बन जाना तू।

हो वेदना तुझे या कोई संताप,
रख विश्वास अपने आप पर,
लोहा भी पिघला देगा,
अपनी शक्ति पहचान तू।


अगर तुम्हारा हिस्सा नही

मैं कौन हूँ, अगर तुम्हारा हिस्सा नही,
मैं कौन हूँ, अगर तुम्हारा किस्सा नही,
तुम मेरी फितरत हो, आदत हो,
तुम नही तो मैं कुछ भी नही।।

समय का खेल है ये, मेरा कसूर नही,
की तुम आज और कल हो, मेरे अतीत में नही,
सुनहरा हर पल है तुम्हारे साथ,
भविष्य की हर घड़ी में हो, वरना वो घड़ी नही।।

स्वप्न सब तेरे साथ, अन्य कोई स्वप्न नही,
ख्वाहिशे सब तेरे साथ, अन्य कोई ख्वाइश नही,
मिलकर पूरी करेंगे सब रास्ते,
राह वो सारी अनजान, जिस राह पर तू नही।।

भारत की गौरव गाथा

हिमालय की चोटी पर जब कोई सैनिक जाता है,
भूख प्यास से व्यथित हो, वो अपने दिन बिताता है,
सर्द रात में जग कर, वो अपना फ़र्ज़ निभाता है,
देश के लिए न जाने वो कितनी गोली खाता है,
राष्ट्र ध्वज तिरंगे में वो फिर लौट कर आता है,
है गर्व हमे हर सैनिक पर, जो देश के लिए जीता है,
और गर्व हमे हर माँ पर जो इन वीरो की जननी है।

है इतिहास हमारा गर्वीला, सभ्यता हमारी अद्धभुत है,
रण बाँकुरे प्रताप-शिवाजी की, ये भरत राज की भूमि है,
मर्यादा में बंधे राम-सिया की, ये लक्ष्मीबाई की भूमि है,
भगत-सुखदेव-राजगुरु की, त्याग की अमिट कहानी है,
चले सुभाष से लोहा लेने, उन अंग्रेजो की मत मारी है।
तुलसी भी पूजी जाती, तुलसी लिखित भी पूजते है,
अतुलनीय है ये देश हमारा, जहा गाये भी माँ कहलाती है।।

कभी मान न करना

मेरी रग रग तुम समझती हो,
मेरे ख्वाबो से बढ़कर तुम हो,
अहसास मुझे तेरे प्यार का हुआ अब,
मेरी बीवी तुम खूब हो।।

बादल को फिर मान हुआ,
गरजा वो और बरसा वो,
पर देखो उस अचल पर्वत को,
जिसको बादल तोड़ न सका।।

पर्वत ने फिर मान किया,
अडिग था वो तूफान में,
पर देखो एक इंसान ने,
पर्वत को भी काट दिया।।

इंसान तू वो गलती न कर,
जो सूरज, बादल, पर्वत ने की,
झुक जाएगा एक दिन,
जो तूने कभी मान किया।।

मेरी बीवी तुम खूब हो।

किसी तीरंदाज का तीर हो,
या किसी बन्दूक की गोली,
अदाओं से तुम जान ले लो,
मेरी बीवी तुम खूब हो।।

तुम हुस्न की परी हो,
मुस्कान की तुम धनी हो,
टुकड़ा हो तुम मेरे दिल का,
मेरी बीवी तुम खूब हो।।

कोयल सी मीठी तुम्हारी बातें,
सबको लुभाती तुम्हारी बातें,
तुम चंचल शोख हसीना हो,
मेरी बीवी तुम खूब हो।।

मेरी रग रग तुम समझती हो,
मेरे ख्वाबो से बढ़कर तुम हो,
अहसास मुझे तेरे प्यार का हुआ अब,
मेरी बीवी तुम खूब हो।।

करवाचौथ

ये करवाचौथ है सुन ले प्यारे,
व्रत करे पत्नी और भुगते सारे पति बेचारे।।

समस्या बड़ी विकट पति की,
सोच सोच के हालत पतली पति की,
उपहार क्या दूँ, संकट कड़ा रहता है,
कुछ खाये तो पछताना पड़ता है।

ये फिल्मो का ही दोष है यारो,
ख्वाब गलत दिखाए इसी ने यारो,
राज ने कुछ कम नही है किये सितम,
सिमरन के लिए व्रत उसी ने किया था यारो।

एकता कपूर ने खूब भुनाया करवाचौथ को,
फैशन बनाया एक सीधे से उपवास को,
बड़े बूड़ो ने सोचा न होगा कभी,
सोलह श्रृंगार भी कम पड़ेंगे पत्नी को।

ये करवाचौथ है प्यारे,
व्रत करे पत्नी और भुगते सारे पति बेचारे।।


हर मुश्किल तब होगी फ़नाह

हर साँस है थकी थकी,
हर लम्हा है थमा थमा,
कुछ बूंदे हौसले की,
अभी भी है जवां जवां,
एक एक कदम बढेगा अगर
मंजिल खड़ी होंगी तेरे आगे यहाँ।।

थक थक के चूर चूर हो जाऊँ,
ठोकर खाकर चाहे मैं गिर जाऊँ,
उठना मैन सीखा है अब,
रुकना नही बढ़ना है अब,
जीत तैयारी की करनी है मुझे,
हर मुश्किल तब होगी फ़नाह।।

Saturday, 11 September 2021

बढ़ते जाना आगे तू

हो रास्ते पर काँटे अगर,
और पाँव में चुभ जाए अगर,
मत कोसना उस काँटे को तू,
बढ़ते जाना आगे तू।।

है मंजिल कोई नही आसान,
तेरे पथ में होंगे और भी मुक़ाम,
हिम्मत से हरदम चलना तू,
बढ़ते जाना आगे तू।।

तेरी हार से तू सबक ले,
फिर उठ खड़ा हो और जीत ले,
सिंह सा फिर गरजना तू,
बढ़ते जाना आगे तू।।

चट्टान सा ठहराव नही,
पानी सा बन, कुछ कम नही,
गंगा सा फिर बहना तू,
बढ़ते जाना आगे तू।।

कृष्ण से विनती

मुझे ब्रज की कान्हा रज बना दो, जिसमे तुमने गैया चराई, वहाँ के वृक्षों के पुष्प बना दो, जिसकी गोपियों ने माला पिरोई, यमुना का मुझे नीर बना दो...