मेरी रग रग तुम समझती हो,
मेरे ख्वाबो से बढ़कर तुम हो,
अहसास मुझे तेरे प्यार का हुआ अब,
मेरी बीवी तुम खूब हो।।
बादल को फिर मान हुआ,
गरजा वो और बरसा वो,
पर देखो उस अचल पर्वत को,
जिसको बादल तोड़ न सका।।
पर्वत ने फिर मान किया,
अडिग था वो तूफान में,
पर देखो एक इंसान ने,
पर्वत को भी काट दिया।।
इंसान तू वो गलती न कर,
जो सूरज, बादल, पर्वत ने की,
झुक जाएगा एक दिन,
जो तूने कभी मान किया।।
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