हृदयावली
I have always loved writing. Be it some blog, or poems. Though my blogs or other writings are in English, my poems are always in Hindi. The flow of words that come up in Hindi is some thing very unique. My poems blog vary from Motivation, Love, Patriotism, bhakti etc. This blog is my effort to put all my creations in one place. Hope you would like my work and will share your thoughts with me.
Saturday, 14 September 2024
कृष्ण से विनती
Wednesday, 4 September 2024
माँ कब अवतार लोगी
Thursday, 22 August 2024
निर्भया
Sunday, 12 September 2021
माँ
मातृ ममता की वेदी पर,
मैंने बचपन बीताया है,
माँ तुम्हारी गोद में,
जाने कितना स्नेह पाया है।।
मैं हूँ बस परछाही तुम्हारी,
मुझमे अंश तुम्हारा है,
खुश रहो माँ तुम सदा,
बस यही स्वर्ग हमारा है।।
माँ तुम हो अनमोल खज़ाना,
खर्च कभी न हो पाएगा,
प्यार तो है निःस्वार्थ तुम्हारा,
वो और कहाँ मिल पाएगा।।
जननी आज जब खुद बनी माँ,
वो प्यार तेरा समझ आया है,
अपनी ममता में तुम्हे ढूंढती,
तेरा आँचल याद फिर आया है।।
इस धरा की हर माँ सबल,
दुर्गा भवानी अतुलित बल
शत शत नमन हर माँ को मेरा,
त्याग की मूरत ये हर पल।।
मोती की माला
एक माला मेरी लाखो की,
लाखो का उसका हर मोती था,
हर मोती उसका एक लम्हा,
एक एक करके जिनको बुना था।
देखो वो माला मेरी टूट गयी,
और मोती सारे बिखर गये,
लम्हे सारे याद है अब भी,
पर अश्रु में सब धुंधला गये।
हर मोती को मैं फिर चुनु,
हर मोती को मैं फिर रखु,
धागा नही पर मेरे पास,
वो माला फिर मैं कैसे बुनु।
धागा था जो टूट गया,
लम्हा हर एक छूट गया,
बंधी गाँठ जो धागे में,
मोती फिर पिरोया न गया।
कैसे पिरोऊँ अपनी माला को,
कैसे संजोऊ उन लम्हो को,
वो माला नही मेरी अब,
जिसमे जिये हजारो लम्हो को।
एक माला मेरी लाखो की,
लाखो का उसका हर मोती था,
हर मोती उसका एक लम्हा,
एक एक करके जिनको बुना था।
मन पतंग
झर झर झर झर बह निकली,
मेरे अश्रु विषाद की धारा,
है मन उदास, ना कोई खास,
ना कोई आज मुझे प्यारा।
मन पतंग का तंग कटा,
डोर हाथ से छूट गयी,
पास के वीराने तने पर,
आज पतंग मेरी अटक गयी।
कोई खींचता है डोर कभी,
कोई लूटता मेरी पतंग कभी,
हर झटके से वो फट जाती,
पर हाथ किसी के ना आयी कभी।
जो फट गई, जो कट गयी,
मन पतंग कहीं उलझ गयी,
शोक मनाता दिल बार बार,
अश्रु से मेरी कमीज भीग गयी।
आज फिर उठता प्रश्न यह,
कितना शोक मनाऊ मैं?
एक पतंग के कट जाने से,
क्या फिर पतंग न उड़ाऊ मैं?
एक और पतंग ली हाथ में,
बांध दी तंग कस कर इस बार,
हवा के संग बह उड़ी वो,
छू लिया गगन को इस बार।
कट जाए या उड़ जाए,
ना शोक है ना लोभ मुझे अब,
कोई कितना भी जोर लगाए
ना मन पतंग कटने का डर अब।
झर झर झर झर बह निकली,
मेरे अश्रु विषाद की धारा,
है मन उदास, ना कोई खास,
ना कोई आज मुझे प्यारा।
एक बार फिर चलो तुम मधुशाला
सबके हाथो में हो मधु का प्याला,
न कोरोना का डर हो न कोई वहाँ रोने वाला,
कोई हमे कुछ कहे, कोई हमारी सुनने वाला।।
एक बार फिर चलो तुम मधुशाला।।
हर चेहरे पर मुस्कान बिछी हो,
हर घूट पी कर , लबो पर कोई गीत छिड़ा हो,
दोस्तों के साथ जमी हो महफ़िल हाला,
एक बार फिर चलो तुम मधुशाला।।
दीन हीन या हो धनवान, कोई फर्क नही करती ये शाला,
न भेद कोई भी करता है, इसके रस को पीने वाला,
कीमत न पूछ इसकी, बहुमूल्य है ये पावन हाला,
एक बार फिर चलो तुम मधुशाला।।
अंतिम बार समझ कर, हर रोज आते है इसके दर पर,
सब कुछ लुटा देने को तत्पर, रहता मधु को पीने वाला,
जीने की चाह में शायद लूट रहा है योवन हाला,
एक बार फिर चलो तुम मधुशाला।।
कृष्ण से विनती
मुझे ब्रज की कान्हा रज बना दो, जिसमे तुमने गैया चराई, वहाँ के वृक्षों के पुष्प बना दो, जिसकी गोपियों ने माला पिरोई, यमुना का मुझे नीर बना दो...
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ये करवाचौथ है सुन ले प्यारे, व्रत करे पत्नी और भुगते सारे पति बेचारे।। समस्या बड़ी विकट पति की, सोच सोच के हालत पतली पति की, उपहार क्या दूँ, ...
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हो रास्ते पर काँटे अगर, और पाँव में चुभ जाए अगर, मत कोसना उस काँटे को तू, बढ़ते जाना आगे तू।। है मंजिल कोई नही आसान, तेरे पथ में होंगे और...
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Those wonders of your eyes, That crazyness of your smile, I will ensure for whole life, That they go an extra mile.. Droplets of those tears...