सबके हाथो में हो मधु का प्याला,
न कोरोना का डर हो न कोई वहाँ रोने वाला,
कोई हमे कुछ कहे, कोई हमारी सुनने वाला।।
एक बार फिर चलो तुम मधुशाला।।
हर चेहरे पर मुस्कान बिछी हो,
हर घूट पी कर , लबो पर कोई गीत छिड़ा हो,
दोस्तों के साथ जमी हो महफ़िल हाला,
एक बार फिर चलो तुम मधुशाला।।
दीन हीन या हो धनवान, कोई फर्क नही करती ये शाला,
न भेद कोई भी करता है, इसके रस को पीने वाला,
कीमत न पूछ इसकी, बहुमूल्य है ये पावन हाला,
एक बार फिर चलो तुम मधुशाला।।
अंतिम बार समझ कर, हर रोज आते है इसके दर पर,
सब कुछ लुटा देने को तत्पर, रहता मधु को पीने वाला,
जीने की चाह में शायद लूट रहा है योवन हाला,
एक बार फिर चलो तुम मधुशाला।।
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