Sunday, 12 September 2021

माँ

मातृ ममता की वेदी पर,
मैंने बचपन बीताया है,
माँ तुम्हारी गोद में,
जाने कितना स्नेह पाया है।।

मैं हूँ बस परछाही तुम्हारी,
मुझमे अंश तुम्हारा है,
खुश रहो माँ तुम सदा,
बस यही स्वर्ग हमारा है।।

माँ तुम हो अनमोल खज़ाना,
खर्च कभी न हो पाएगा,
प्यार तो है निःस्वार्थ तुम्हारा,
वो और कहाँ मिल पाएगा।।

जननी आज जब खुद बनी माँ,
वो प्यार तेरा समझ आया है,
अपनी ममता में तुम्हे ढूंढती,
तेरा आँचल याद फिर आया है।।

इस धरा की हर माँ सबल,
दुर्गा भवानी अतुलित बल
शत शत नमन हर माँ को मेरा,
त्याग की मूरत ये हर पल।।

No comments:

Post a Comment

कृष्ण से विनती

मुझे ब्रज की कान्हा रज बना दो, जिसमे तुमने गैया चराई, वहाँ के वृक्षों के पुष्प बना दो, जिसकी गोपियों ने माला पिरोई, यमुना का मुझे नीर बना दो...