हे माँ! किस किस का तुम संहार करोगी?
घर घर में अब महिष बैठे है,
हर मन में असुर अब बसते हैं,
जो दिन–रात भक्षण करते है।
हे माँ! कैसे तुम्हारा सिंह धहाड़ेगा?
हर मुख पर तो ताले लगे है,
ये गुपचुप बातें तो करते है,
पर विरोध करने से डरते है।
हे माँ! कैसे तुम्हारे अब अस्त्र चलेंगे?
शक्ति अब दुष्टों के पास है,
पापियों का ही यहाँ राज है,
जो सबका दमन करते हैं।
हे माँ! क्या तुम फिर अवतार लोगी?
हर नारी में अब तुम अवतरित हो,
हर भुजा में तुम्हारी शक्ति हो,
और हर पापी का संहार हो।
No comments:
Post a Comment