हिमालय की चोटी पर जब कोई सैनिक जाता है,
भूख प्यास से व्यथित हो, वो अपने दिन बिताता है,
सर्द रात में जग कर, वो अपना फ़र्ज़ निभाता है,
देश के लिए न जाने वो कितनी गोली खाता है,
राष्ट्र ध्वज तिरंगे में वो फिर लौट कर आता है,
है गर्व हमे हर सैनिक पर, जो देश के लिए जीता है,
और गर्व हमे हर माँ पर जो इन वीरो की जननी है।
है इतिहास हमारा गर्वीला, सभ्यता हमारी अद्धभुत है,
रण बाँकुरे प्रताप-शिवाजी की, ये भरत राज की भूमि है,
मर्यादा में बंधे राम-सिया की, ये लक्ष्मीबाई की भूमि है,
भगत-सुखदेव-राजगुरु की, त्याग की अमिट कहानी है,
चले सुभाष से लोहा लेने, उन अंग्रेजो की मत मारी है।
तुलसी भी पूजी जाती, तुलसी लिखित भी पूजते है,
अतुलनीय है ये देश हमारा, जहा गाये भी माँ कहलाती है।।
No comments:
Post a Comment