घड़ी घड़ी की खुशियाँ है,
जी ले हर उस घड़ी को तू,
घड़ी घड़ी के गम आएँगे,
ना उसमे फिर घबराना तू ।
सुबह के बाद शाम है,
और शाम के बाद अंधेरा,
हर रात के बाद सवेरा होगा,
इतना यकीन रखना तू।
श्री कृष्ण ने कहा था गीता में,
योग होता है सम भाव में,
सुख दुःख जीवन का अभिन्न अंग,
जैसे उफान समुद्र की लहरों में।
अचल पर्वत की स्थिरता को,
आत्म समागम करले तू,
तोड़ सके न कोई प्रलय,
इतना अटल बन जाना तू।
गर्मी ज्वालामुखी में जितनी,
ऊर्जा है तेरे अंदर उतनी,
तपती धूप में चमक उठे,
वो कनक बन जाना तू।
हो वेदना तुझे या कोई संताप,
रख विश्वास अपने आप पर,
लोहा भी पिघला देगा,
अपनी शक्ति पहचान तू।
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